आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में शिक्षा समूहों की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि वे कितने कार्यक्रम चलाते हैं या कितनी संस्थाओं का प्रबंधन करते हैं। अब उनकी वास्तविक शक्ति इस बात में भी देखी जाती है कि वे भविष्य को कितनी दूर तक समझते हैं, बदलावों को कितनी समझदारी से पढ़ते हैं, और सीखने की दुनिया के लिए कितने उपयोगी, लचीले और टिकाऊ मॉडल विकसित करते हैं। इसी संदर्भ में अनुसंधान और नवाचार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। ये केवल अकादमिक शब्द नहीं हैं, बल्कि ऐसे व्यावहार