शिक्षा आज एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। अब यह केवल एक कक्षा, एक शहर या एक पारंपरिक शिक्षण पद्धति तक सीमित नहीं रही। आज का शिक्षार्थी ऐसी शिक्षा चाहता है जो अधिक लचीली हो, अधिक जुड़ी हुई हो, विश्वस्तरीय दृष्टि रखती हो, और आधुनिक जीवन की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुकूल हो। यह परिवर्तन केवल तकनीक जोड़ देने का मामला नहीं है, बल्कि शिक्षा को अधिक बुद्धिमान, अधिक उपयोगी और अधिक मानवीय रूप से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया है। शिक्षा के इस अगले चरण को तीन मुख्य शब्दों में समझा जा सकता