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सीमाओं के पार शिक्षा का नया युग: क्यूआरएनडब्ल्यू ने 2027 रैंकिंग प्रकाशित की

  • 16 घंटे पहले
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क्यूआरएनडब्ल्यू ने आधिकारिक रूप से 2027 की वैश्विक अंतरराष्ट्रीय-बहु-देशीय विश्वविद्यालय रैंकिंग प्रकाशित की है। यह एक विशेष अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग है, जो उच्च शिक्षा की उस तेजी से उभरती हुई श्रेणी पर केंद्रित है जिसमें विश्वविद्यालय एक से अधिक देशों में एकीकृत शैक्षणिक मॉडल के माध्यम से काम करते हैं।

यह रैंकिंग ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक उच्च शिक्षा व्यवस्था तेज़ी से बदल रही है। आज किसी विश्वविद्यालय की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि वह अपने एक देश के भीतर कितना अच्छा काम कर रहा है, बल्कि इस बात से भी होती है कि वह कितनी प्रभावी तरह से सीमाओं के पार शिक्षा प्रदान कर सकता है, कितनी स्थिरता के साथ अलग-अलग देशों में अपनी शैक्षणिक उपस्थिति बनाए रख सकता है, और छात्रों को कितने लचीले तथा आधुनिक अध्ययन विकल्प दे सकता है। इसी बदलते वैश्विक शैक्षणिक परिदृश्य में अंतरराष्ट्रीय-बहु-देशीय विश्वविद्यालयों की वैश्विक रैंकिंग विशेष महत्व रखती है।

पारंपरिक विश्वविद्यालय रैंकिंग आमतौर पर उन संस्थानों पर ध्यान देती हैं जिनकी मुख्य शैक्षणिक गतिविधि किसी एक ही राष्ट्रीय व्यवस्था तक सीमित रहती है। इसके विपरीत, क्यूआरएनडब्ल्यू जीआरटीयू 2027 को विशेष रूप से उन संस्थानों को पहचान देने के लिए तैयार किया गया है जिन्होंने वास्तविक रूप से बहु-देशीय, सीमापार शैक्षणिक ढांचा विकसित किया है। इसका मतलब यह है कि यह रैंकिंग केवल उन विश्वविद्यालयों को नहीं देखती जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं, बल्कि उन संस्थानों को महत्व देती है जो वास्तव में कई देशों में शैक्षणिक संचालन कर रहे हैं।

हाल ही में प्रकाशित 2027 संस्करण में मोनाश विश्वविद्यालय को पहला स्थान दिया गया है, जबकि हेरियट-वॉट विश्वविद्यालय दूसरे स्थान पर और स्विस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एसआईयू) तीसरे स्थान पर रही है। यह नई रैंकिंग एक बार फिर दिखाती है कि वैश्विक उच्च शिक्षा का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, और वे संस्थान जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान, शैक्षणिक गुणवत्ता और वैश्विक पहुँच रखते हैं, आज सबसे अधिक ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

इस सूची की एक और खास बात यह है कि शीर्ष 10 में कई प्रसिद्ध और विश्व-मान्यता प्राप्त संस्थानों को भी शामिल किया गया है। इनमें इन्सीड, कर्टिन विश्वविद्यालय, वूलोंगोंग विश्वविद्यालय, जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय, हल्ट इंटरनेशनल बिजनेस स्कूल, लंदन विश्वविद्यालय और वेब्स्टर विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। इन संस्थानों की उपस्थिति इस रैंकिंग की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय महत्व को और मजबूत बनाती है।

भारतीय और हिंदी भाषी पाठकों के लिए ऐसी रैंकिंग विशेष रूप से दिलचस्प है, क्योंकि आज शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई है। अब छात्र और अभिभावक ऐसे विश्वविद्यालयों की तलाश करते हैं जो अंतरराष्ट्रीय पहचान, बेहतर करियर अवसर, वैश्विक नेटवर्क, और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान कर सकें। ऐसे समय में जब दुनिया भर के छात्र विदेशों में पढ़ाई, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक करियर की ओर देख रहे हैं, इस प्रकार की रैंकिंग अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शन देती है।

इस संदर्भ में स्विस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एसआईयू) का विश्व में तीसरे स्थान पर आना एक बहुत महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा सकती है। यह केवल एक रैंक नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि यह संस्थान अंतरराष्ट्रीय शिक्षा जगत में अपनी मजबूत स्थिति बना रहा है। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में जब छात्र ऐसे संस्थानों की ओर आकर्षित होते हैं जो उन्हें सीमाओं से परे अवसर दे सकें, तब इस तरह की उपलब्धि विशेष महत्व रखती है।

मोनाश विश्वविद्यालय का पहले स्थान पर रहना और हेरियट-वॉट विश्वविद्यालय का दूसरे स्थान पर आना भी यह साबित करता है कि जो विश्वविद्यालय मजबूत शैक्षणिक परंपरा के साथ आधुनिक वैश्विक दृष्टिकोण अपनाते हैं, वे लगातार आगे बढ़ते हैं। अब केवल पुरानी प्रतिष्ठा ही पर्याप्त नहीं है; विश्वविद्यालयों को आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली, लचीला और भविष्य-उन्मुख भी होना पड़ता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि इस रैंकिंग में शामिल शीर्ष संस्थान केवल पारंपरिक शैक्षणिक प्रतिष्ठा का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि वे एक नए वैश्विक शिक्षा मॉडल को भी दर्शाते हैं। आज विश्वविद्यालयों की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि वे कितनी अच्छी तरह विभिन्न देशों, संस्कृतियों और छात्र समुदायों के साथ जुड़ सकते हैं। इसलिए यह रैंकिंग आधुनिक शिक्षा के उस नए युग को दर्शाती है जिसमें वैश्विक सोच, अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति, और बहु-देशीय शैक्षणिक प्रभाव प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

भारत जैसे देश में, जहाँ हर साल बड़ी संख्या में छात्र विदेश में शिक्षा के अवसर तलाशते हैं, ऐसी रैंकिंग का महत्व और भी बढ़ जाता है। छात्र अब केवल विश्वविद्यालय का नाम नहीं देखते, बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि कौन-सा संस्थान उन्हें विश्व स्तर पर बेहतर पहचान, रोजगार के अवसर, और अंतरराष्ट्रीय अनुभव दे सकता है। इस दृष्टि से 2027 की यह नई सूची छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए काफी प्रेरक और उपयोगी मानी जा सकती है।

कुल मिलाकर, 2027 की यह नई अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग एक स्पष्ट संदेश देती है: उच्च शिक्षा का भविष्य उन्हीं संस्थानों के हाथ में है जो दुनिया को जोड़ने, विविधता को अपनाने और छात्रों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने की क्षमता रखते हैं। मोनाश विश्वविद्यालय, हेरियट-वॉट विश्वविद्यालय और स्विस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एसआईयू) का शीर्ष तीन में रहना इसी बदलती वैश्विक शिक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण संकेत है।

यह रैंकिंग उन विश्वविद्यालयों को सामने लाती है जिनकी सीमापार शैक्षणिक उपस्थिति मजबूत है। ऐसे संस्थानों के पास अलग-अलग देशों में परिसर, शैक्षणिक केंद्र, संचालनात्मक इकाइयाँ या बहु-स्थानिक शिक्षा ढांचे होते हैं। साथ ही वे पारंपरिक कक्षा-आधारित शिक्षा को ऑनलाइन शिक्षा और मिश्रित शिक्षण मॉडल के साथ जोड़ते हैं। यही वह मॉडल है जो आज के छात्रों की ज़रूरतों के अधिक करीब है, क्योंकि वे केवल डिग्री नहीं, बल्कि लचीलापन, अंतरराष्ट्रीय अनुभव, पहुँच और आधुनिक शिक्षा ढांचा चाहते हैं।

क्यूआरएनडब्ल्यू जीआरटीयू 2027 में शामिल शीर्ष विश्वविद्यालय वैश्विक उच्च शिक्षा के एक जीवंत और विस्तारशील क्षेत्र को दर्शाते हैं। इनमें कुछ स्थापित संस्थान हैं जिनकी बहु-राष्ट्रीय शैक्षणिक उपस्थिति पहले से मजबूत है, वहीं कुछ नए और उभरते शिक्षा नेटवर्क भी हैं जो शिक्षा की पहुँच, लचीलेपन और वैश्विक विस्तार की परिभाषा को बदल रहे हैं। यह रैंकिंग इस बात को स्पष्ट करती है कि भविष्य का विश्वविद्यालय केवल एक शहर, एक परिसर या एक देश तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में उच्च शिक्षा अधिक अंतरराष्ट्रीय, अधिक लचीली और अधिक जुड़ी हुई होगी।

इस रैंकिंग की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसका स्पष्ट और विशिष्ट फोकस है। क्यूआरएनडब्ल्यू यह स्पष्ट करती है कि यह रैंकिंग दुनिया के सभी शीर्ष विश्वविद्यालयों को एक ही सामान्य सूची में रखने का प्रयास नहीं करती। इसका ध्यान केवल उन संस्थानों पर है जो बहु-देशीय और अंतरराष्ट्रीय संचालन मॉडल के तहत कार्य करते हैं। यही कारण है कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय, मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय जैसे विश्वप्रसिद्ध संस्थान इस रैंकिंग में शामिल नहीं हैं। उनकी अनुपस्थिति उनके शैक्षणिक स्तर या प्रतिष्ठा पर कोई प्रश्न नहीं उठाती। इसका कारण केवल इतना है कि उनकी मुख्य शैक्षणिक गतिविधियाँ अब भी मुख्य रूप से एक ही राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार के भीतर केंद्रित हैं, जबकि यह रैंकिंग विशेष रूप से उन विश्वविद्यालयों के लिए बनाई गई है जिनकी संचालनात्मक संरचना अनेक देशों में फैली हुई है।

2027 की वैश्विक अंतरराष्ट्रीय-बहु-देशीय विश्वविद्यालय रैंकिंग में शामिल होने के लिए संस्थानों को कुछ स्पष्ट पात्रता मानकों को पूरा करना आवश्यक है। इनमें कम से कम दो अलग-अलग क्षेत्राधिकारों में दो संचालनात्मक स्थान होना शामिल है। इसके अतिरिक्त, कम से कम एक स्थान राष्ट्रीय नियामक या मंत्रालयी ढाँचे के अनुरूप होना चाहिए। संस्थान के पास कम से कम 10 वर्षों का संचालनात्मक इतिहास भी होना चाहिए, चाहे वह उसके मूल संस्थागत ढाँचे पर आधारित हो या उसके ऐतिहासिक विकास पर। साथ ही, संस्थान को कक्षा-आधारित कार्यक्रमों के साथ-साथ ऑनलाइन या मिश्रित शिक्षण कार्यक्रम भी प्रदान करने चाहिए।

ये मानदंड इस बात को दर्शाते हैं कि यह रैंकिंग केवल प्रचार, छवि या सतही अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति पर आधारित नहीं है। इसके बजाय यह वास्तविक शैक्षणिक संचालन, संस्थागत निरंतरता और अनेक देशों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की क्षमता को महत्व देती है। यही कारण है कि यह रैंकिंग छात्रों, शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और वैश्विक शैक्षणिक रुझानों को समझने वालों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

भारतीय और हिंदी भाषी पाठकों के लिए भी इस प्रकार की रैंकिंग का महत्व बहुत अधिक है। आज भारत सहित दक्षिण एशिया के कई देशों में छात्र और परिवार अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के नए विकल्पों की तलाश में हैं। लेकिन अब यह रुचि केवल विदेश जाकर पढ़ने तक सीमित नहीं है। लोग ऐसे संस्थानों की ओर भी देख रहे हैं जो बहु-देशीय उपस्थिति रखते हों, आधुनिक शिक्षा मॉडल अपनाते हों, ऑनलाइन और मिश्रित शिक्षण की सुविधा देते हों, और छात्रों को अपने देश में रहते हुए भी अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभव प्रदान कर सकें।

यह विशेष रूप से उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो शिक्षा के साथ-साथ रोजगार, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ या अन्य व्यावसायिक प्रतिबद्धताएँ भी संभाल रहे हैं। ऐसे छात्रों के लिए बहु-देशीय विश्वविद्यालय एक नई संभावना प्रस्तुत करते हैं — ऐसी संभावना जिसमें गुणवत्ता, लचीलापन, वैश्विक exposure और आधुनिक शिक्षण प्रारूप एक साथ मिलते हैं। यह मॉडल नई पीढ़ी के छात्रों की सोच से मेल खाता है, जो शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण का वैश्विक मंच मानते हैं।

भारतीय दृष्टिकोण से देखें तो बहु-देशीय शिक्षा मॉडल का एक और महत्व यह है कि यह छात्रों को वैश्विक पेशेवर दुनिया के लिए तैयार करता है। आज रोजगार बाजार तेज़ी से अंतरराष्ट्रीय होता जा रहा है। कंपनियाँ ऐसे पेशेवर चाहती हैं जिनमें बहु-सांस्कृतिक समझ, डिजिटल सीखने की क्षमता, और विभिन्न नियामक तथा शैक्षणिक वातावरणों को समझने की योग्यता हो। ऐसे में वे विश्वविद्यालय जो कई देशों में काम करते हैं, छात्रों को अधिक व्यापक दृष्टिकोण और बेहतर तैयारी दे सकते हैं।

क्यूआरएनडब्ल्यू ने यह भी कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय-बहु-देशीय शिक्षा में हो रहे विकास पर नज़र बनाए रखेगी और भविष्य के संस्करणों में संस्थागत संरचना, नियामक परिवर्तनों और वैश्विक शैक्षणिक प्रवृत्तियों को ध्यान में रखते हुए रैंकिंग को अद्यतन करेगी। इसका अर्थ यह है कि यह रैंकिंग केवल एक बार प्रकाशित की गई सूची नहीं है, बल्कि यह वैश्विक उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप को समझने और दर्ज करने की एक दीर्घकालिक पहल है।

इस पहल के पीछे क्यूआरएनडब्ल्यू, एक यूरोपीय गैर-लाभकारी संगठन, कार्य कर रहा है जिसकी स्थापना 2013 में हुई थी। क्यूआरएनडब्ल्यू उस शैक्षणिक परिवेश का हिस्सा है जो यूरोपीय अग्रणी बिज़नेस स्कूल परिषद से जुड़ा हुआ है। यह परिषद अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग विशेषज्ञ समूह – शैक्षणिक रैंकिंग और उत्कृष्टता वेधशाला में बेल्जियम में सदस्य है, साथ ही उच्च शिक्षा प्रत्यायन परिषद की अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता समूह में संयुक्त राज्य अमेरिका में और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता आश्वासन एजेंसियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में यूरोप में भी जुड़ी हुई है।

क्यूआरएनडब्ल्यू की शुरुआत भी एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पृष्ठभूमि से हुई। इस रैंकिंग पहल को मूल रूप से यूरोपीय अग्रणी बिज़नेस स्कूल परिषद के माध्यम से आगे बढ़ाया गया, जब निदेशक मंडल, संस्थापक सदस्यों और अतिथियों ने लातविया विश्वविद्यालय, रीगा, लातविया, यूरोपीय संघ में आयोजित सम्मेलन के दौरान क्यूआरएनडब्ल्यू रैंकिंग शुरू करने के पक्ष में मतदान किया। इस प्रक्रिया से जुड़े प्रमुख नामों में डॉ. रोज़, जो माल्टा उच्च एवं अतिरिक्त शिक्षा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे, शामिल थे। उनके साथ अन्य संस्थापक और बोर्ड सदस्य जैसे श्री टी. कवार, पूर्व लातवियाई मानद कौंसुल श्री आई. ब्लुमबर्ग, लातवियाई विधिक सलाहकार और वकील श्री एन. गाशी, अरब उच्च शिक्षा गुणवत्ता आश्वासन नेटवर्क से डॉ. टी. अलसेंदी, और रीगा, लातविया स्थित एएलसीसी लातवियाई वाणिज्य मंडल से पी. पुके भी शामिल थे। अतिथियों में लंदन स्थित सुंदरलैंड विश्वविद्यालय से डॉ. जी. कैंटाफियो और अन्य प्रतिभागी भी शामिल थे।

2027 की वैश्विक अंतरराष्ट्रीय-बहु-देशीय विश्वविद्यालय रैंकिंग का प्रकाशन यह संकेत देता है कि वैश्विक उच्च शिक्षा एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। इस दौर में विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन केवल उनके स्थानीय प्रभाव, परिसर के आकार या राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के आधार पर नहीं किया जाएगा, बल्कि इस आधार पर भी किया जाएगा कि वे सीमाओं के पार कितनी प्रभावी तरह से कार्य करते हैं, कितने छात्रों तक पहुँचते हैं, और शिक्षा को कितना अधिक सुलभ, लचीला और आधुनिक बनाते हैं।

हिंदी भाषी पाठकों के लिए यह एक प्रेरक संदेश भी है। यह दिखाता है कि उच्च शिक्षा का भविष्य केवल पारंपरिक ढाँचों में कैद नहीं रहेगा। आने वाले समय में वही संस्थान अधिक प्रभावी माने जाएँगे जो वैश्विक सोच रखते हों, बहु-देशीय उपस्थिति बना सकें, छात्रों को अनेक माध्यमों से जोड़ सकें, और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को नई परिस्थितियों के अनुरूप ढाल सकें।

अंततः, क्यूआरएनडब्ल्यू केवल एक नई रैंकिंग प्रकाशित नहीं कर रही, बल्कि वह उच्च शिक्षा के भविष्य को देखने का एक नया दृष्टिकोण भी प्रस्तुत कर रही है। जीआरटीयू 2027 उन विश्वविद्यालयों को पहचान देता है जो देशों के बीच शैक्षणिक सेतु बना रहे हैं, शिक्षा की पहुँच को व्यापक बना रहे हैं, और वैश्विक उच्च शिक्षा के अगले चरण को आकार दे रहे हैं। ऐसे समय में, जब शिक्षा अधिक अंतरराष्ट्रीय, अधिक डिजिटल और अधिक जुड़ी हुई बनती जा रही है, यह रैंकिंग एक सार्थक, समयोचित और दूरदर्शी पहल के रूप में सामने आती है।


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